कोहिनूर हीरा दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और कीमती रत्नों में से एक है। यह हीरा भारत में पाया गया था और इसका नाम फारसी शब्द ‘कोह-ए-नूर’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘प्रकाश का पर्वत’। इसका इतिहास 5,000 साल से भी अधिक पुराना माना जाता है और यह कई महान शासकों के मुकुट की शोभा बढ़ा चुका है।
कोहिनूर हीरे का प्रारंभिक इतिहास
कोहिनूर हीरे का इतिहास लगभग 800 साल पुराना है। माना जाता है कि यह हीरा भारत के गोलकुंडा की खानों से निकला था, जो आंध्र प्रदेश में स्थित हैं। गोलकुंडा की खानें दुनिया भर में हीरों के लिए प्रसिद्ध थीं। कोहिनूर हीरे का पहला उल्लेख 1304 में मिलता है, जब यह काकतीय वंश के शासकों के पास था। उस समय इसे "स्यामंतक मणि" के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि यह हीरा काकतीय राजाओं के मंदिर में देवी भद्रकाली की मूर्ति की आंखों में जड़ा हुआ था।
कोहिनूर हीरे का मुगल साम्राज्य में प्रवेश
1526 में, मुगल सम्राट बाबर ने भारत पर आक्रमण किया और दिल्ली सल्तनत को हराया। उसके बाद, कोहिनूर हीरा मुगल साम्राज्य के खजाने में शामिल हो गया। बाबर ने अपनी आत्मकथा "बाबरनामा" में इस हीरे का उल्लेख किया है। मुगल सम्राट शाहजहाँ ने इस हीरे को अपने प्रसिद्ध मयूर सिंहासन में जड़वाया, जो दुनिया के सबसे कीमती सिंहासनों में से एक था। शाहजहाँ के शासनकाल में कोहिनूर हीरा मुगल साम्राज्य की शान और समृद्धि का प्रतीक बन गया।
नादिर शाह और कोहिनूर हीरा
1739 में, फारसी शासक नादिर शाह ने भारत पर आक्रमण किया और दिल्ली को लूटा। उसने मुगल साम्राज्य से कोहिनूर हीरा छीन लिया। कहा जाता है कि नादिर शाह ने ही इस हीरे का नाम "कोहिनूर" रखा, जो फारसी भाषा में "रोशनी का पहाड़" होता है। नादिर शाह ने इस हीरे को अपने खजाने में रखा, लेकिन उसकी मृत्यु के बाद, कोहिनूर हीरा अफगानिस्तान के शासक अहमद शाह दुर्रानी के हाथों में चला गया।
कोहिनूर हीरे की भारत वापसी
1830 में, अफगानिस्तान के शासक शाह शुजा दुर्रानी ने कोहिनूर हीरा सिख सम्राट रणजीत सिंह को सौंप दिया। रणजीत सिंह ने इस हीरे को अपने खजाने में रखा और इसे अपनी शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना। रणजीत सिंह की मृत्यु के बाद, सिख साम्राज्य कमजोर हो गया और अंग्रेजों ने भारत पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया।
कोहिनूर हीरे का ब्रिटिश साम्राज्य में प्रवेश
1849 में, द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के बाद, अंग्रेजों ने पंजाब पर कब्जा कर लिया और कोहिनूर हीरे को ब्रिटिश साम्राज्य के हाथों में सौंप दिया गया। इस हीरे को ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को भेंट किया गया। महारानी विक्टोरिया ने इस हीरे को लंदन ले जाने का आदेश दिया और इसे टावर ऑफ लंदन में रखा गया।
कोहिनूर हीरे का कटिंग और पुनर्निर्माण
ब्रिटेन पहुंचने के बाद, कोहिनूर हीरे को काटकर उसका आकार बदला गया। इस प्रक्रिया में हीरे का वजन 186 कैरेट से घटकर 105.6 कैरेट हो गया। इसके बाद, कोहिनूर हीरे को ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स में शामिल किया गया और इसे क्वीन मैरी और क्वीन एलिजाबेथ के मुकुट में जड़ा गया। आज, यह हीरा ब्रिटिश राजशाही का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कोहिनूर हीरे की खासियत
आकार और वजन: कोहिनूर हीरा मूल रूप से 186 कैरेट का था, लेकिन इसे काटकर 105.6 कैरेट कर दिया गया। यह हीरा अपने बड़े आकार और चमक के लिए जाना जाता है।
रंग और चमक: कोहिनूर हीरा एक बेदाग और सफेद हीरा है, जिसकी चमक अद्वितीय है। यह हीरा अपनी प्राकृतिक सुंदरता और दुर्लभता के लिए प्रसिद्ध है।
ऐतिहासिक महत्व: कोहिनूर हीरा न केवल एक कीमती रत्न है, बल्कि यह इतिहास और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। यह हीरा कई शासकों और साम्राज्यों के हाथों से गुजरा है और इसके साथ कई कहानियां जुड़ी हुई हैं।
किंवदंती: कोहिनूर हीरे के साथ एक प्रसिद्ध किंवदंती जुड़ी हुई है कि यह हीरा अपने मालिक की किस्मत बदल देता है। कहा जाता है कि जो भी इस हीरे का मालिक बना, उसकी किस्मत खराब हो गई। हालांकि, यह सिर्फ एक किंवदंती है और इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।
कोहिनूर हीरे का वर्तमान
आज, कोहिनूर हीरा ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है और इसे लंदन के टावर ऑफ लंदन में प्रदर्शित किया गया है। भारत, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान ने कोहिनूर हीरे को वापस लेने की मांग की है, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इन मांगों को खारिज कर दिया है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि कोहिनूर हीरा उनके पास कानूनी रूप से है और इसे वापस करने का कोई इरादा नहीं है।
निष्कर्ष
कोहिनूर हीरा न केवल एक कीमती रत्न है, बल्कि यह इतिहास, संस्कृति, और राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। इस हीरे के साथ जुड़ी कहानियां और किंवदंतियां इसे और भी रोचक बनाती हैं। कोहिनूर हीरे का इतिहास सदियों पुराना है और यह कई शासकों और साम्राज्यों के हाथों से गुजरा है। आज, यह हीरा ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है और इसे दुनिया भर में प्रदर्शित किया जाता है। कोहिनूर हीरे की खासियत और इसके साथ जुड़े रहस्य इसे दुनिया के सबसे प्रसिद्ध हीरों में से एक बनाते हैं।
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